🎵इठलाती हुई बलखाती हुई चाली🎵
🙏 गायक: चेतना शुक्ला
🎼 संगीत: एम.एस.रावत
विवरण:
इठलाती हुई बल खाती हुई चली भजन में माँ गौरा की महिमा और भगवान शिव के प्रति उनकी भक्ति का सुंदर वर्णन किया गया है। चेतना शुक्ला की आवाज़ में यह भजन भक्तों को देवी पार्वती की यात्रा और शिव के साथ उनके गहरे संबंध की ओर प्रेरित करता है। भजन में माँ गौरा के रूप, उनके वचन और शिव के साथ उनके अद्भुत प्रेम का बखान किया गया है। इस भजन के शब्दों में गहरी श्रद्धा और भक्ति का संदेश छिपा है।
गीत के बोल:
इठलाती हुई बल खाती हुई,
चली पनिया भरन शिव नार,
सागर में उतारी गागरिया।।
रूप देख कर सागर बोला,
कौन पिता महतारी,
कौन देश की रहने वाली,
कौन पुरुष की नारी,
बता दे कौन पुरुष की नारी,
हौले हौले गौरा बोले,
छाया है रूप अपार रे,
सागर में उतारी गागरिया।
इठलाती हुई बल खाती हुई,
चली पनियां भरन शिव नार,
सागर में उतारी गागरिया।।
राजा हिमाचल पिता हमारे,
मैनावती महतारी,
शिव शंकर है पति हमारे,
मैं उनकी घर नारी,
समुंदर मैं उनकी घर नारी,
जल ले जाऊं पिय नहलाऊं,
तू सुन ले वचन हमार रे,
सागर में उतारी गागरिया।
इठलाती हुई बल खाती हुई,
चली पनियां भरन शिव नार,
सागर में उतारी गागरिया।।
कहे समुंदर छोड़ भोले को,
पास हमारे आओ,
चौदह रत्न छुपे है मुझमे,
बैठी मौज उड़ाओ,
गिरजा बैठी मौज उड़ाओ,
वो है योगिया पीवत भंगिया,
क्यों सहती कष्ट अपार रे,
सागर में उतारी गागरिया।
इठलाती हुई बल खाती हुई,
चली पनियां भरन शिव नार,
सागर में उतारी गागरिया।।
क्रोधित होकर चली है गौरा,
पास भोले के आई,
तुम्हरे रहते तके समुंदर,
सारी कथा सुनाई,
भोले को सारी कथा सुनाई,
शिव कियो जतन,
सागर को मथन,
लियो चौदह रतन निकाल रे,
सागर में उतारी गागरिया।
इठलाती हुई बल खाती हुई,
चली पनियां भरन शिव नार,
सागर में उतारी गागरिया।।
इठलाती हुई बल खाती हुई,
चली पनिया भरन शिव नार,
सागर में उतारी गागरिया।।
Credit Details :
Song: Ithlati Hue Balkhati Hue Chali
Singer: Chetna Shukla
Music: M.S.Rawat
Lyrics: Traditional
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